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अप्रैल, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या कालसर्प योग है ? या फिर कालसर्प योग नहीं है ? वैदिक ज्योतिष शास्त्र में इसकी क्या अवधारणा है जरूर पढ़ें।

  कालसर्प योग है, यह बताने वालों का प्रथम पक्ष : कालसर्प योग कैसे बनता ? राहु और केतु ऐसे ग्रह हैं जो हमेशा एक दूसरे से सात भाव आगे स्थित रहते है, अथार्त हमेशा 180 डिग्री पर होते हैं। यदि राहु कुंडली के प्रथम भाव में स्थित है तो केतु सप्तम भाव में होगा, यदि केतु प्रथम भाव में स्थित है तो राहु सप्तम भाव में स्थित होगा। इसी प्रकार कुंडली के किसी भी भाव में यदि राहु स्थित है तो उससे ७ भाव आगे केतु अवश्य स्थित होगा।  अब यदि किसी कुंडली में अन्य सारे ग्रह राहु और केतु से मध्य के भावों में स्थित हो जाएँ तो इसी को कालसर्प योग के नाम से जानते हैं। उदाहरण के लिए मान लीजिए किसी की कुंडली में राहु प्रथम भाव में और केतु सप्तम भाव में स्थित है। तथा अन्य सारे  ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र एवं शनि) द्वितीय भाव से षष्ट भाव के मध्य कहीं भी स्थित हो जाएं अथवा अष्टम भाव से द्वादश भाव के मध्य कहीं भी स्थित हो जाएं  तो इसी स्थिति को कुण्डली में कालसर्प योग माना जाता है। चूँकि कुंडली में 12 भाव होते है, स्वाभाविक रूप से उपरोक्त परिस्थिति भी 12 प्रकार की उत्पन्न होगी, इसी को ...

What is Kalsarp Yoga? Or is it not Kalsarp Yoga? What is its concept in Vedic astrology, must read

  The first side of those who tell that there is Kalsarp Yoga: How is Kalsarp Yoga formed? Rahu and Ketu are planets that are always seven houses ahead of each other, that is, they are always at 180 degrees. If Rahu is situated in the first house of the horoscope then Ketu will be in the seventh house, if Ketu is situated in the first house then Rahu will be situated in the seventh house. Similarly, if Rahu is located in any house of the horoscope, then Ketu will definitely be located 7 houses ahead of it. Now, if all the other planets in a horoscope are situated in the houses between Rahu and Ketu, then it is known as Kalsarp Yog. For example, suppose Rahu is in the first house and Ketu is in the seventh house in someone's horoscope. And all the other planets (Sun, Moon, Mars, Mercury, Guru, Venus and Saturn) are located anywhere between the second house to the sixth house or anywhere between the eighth house to the twelfth house, then this situation is seen in the horoscope. Kals...

Is court marriage important or social marriage important according to astrology?

According to Vedic scriptures, there are eight types of marriages. These types of marriage are- Brahma, Daiva, Arsh, Prajapatya, Asura, Gandharva, Rakshasa and Pishacha. Out of the above eight marriages, only Brahma marriage has been recognized, the rest of the marriages have not been considered according to religion. Hindu marriage is a religious ceremony. Sanskar leads to inner purification and married life can be spent happily only in a pure heart. Only Brahma marriage has been included in 16 sacraments. 1.Brahma Vivah: With the consent of both the parties, fixing the marriage of a girl with a suitable groom of the same class as per the wish of the girl is called 'Brahma Vivah'. Vedic rituals and rules are followed in this marriage. This is the best marriage. Marriage of a girl with a groom of good character and good family with her consent and according to Vedic rituals is called Brahma Vivah. There is no compulsion on the bride and groom in this. This marriage is done in a...

भारतीय वैदिक ज्योतिषशास्त्र ( गणित-फलित ) भाग - ४७ अष्टोत्तरी दशा साधन, भावानुसार शुभाशुभ फल, अष्टोत्तरी दशा प्रयोग में विशेष

  कुंडली के बारहों भाव से विचार  ( पिछली लेख में शेष ) सप्तम भाव : विवाह, जीवनसाथी, उसका व्यक्तित्व, जीवनसाथी के साथ रिश्ता, व्यवसायिक साथी , इच्छाएं, काम शक्ति, साझेदारी, प्रत्यक्ष शत्रु, मुआवजा, यात्रा, कानून, जीवन के लिए खतरा, विदेशों में प्रभाव और प्रतिष्ठा, जनता के साथ रिश्ते, यौन रोग, मूत्र रोग, मारक। अष्टम भाव : आयु, मृत्यु का प्रकार यानी मृत्यु कैसे होगी, जननांग, बाधाएं, दुर्घटना, मुफ़्त की संपत्ति, विरासत, बपौती, पैतृक संपत्ति, वसीयत, पेंशन, परिधान, चोरी, डकैती, चिंता, रूकावट, युद्ध, शत्रु, विरासत में मिला धन, मानसिक वेदना, ससुराल, विवाहेत्तर जीवन। नवम भाव : भाग्‍य, पिता, गुरु, धर्म, सौभाग्य, चरित्र, दादा-दादी, लंबी यात्राएं, पोता, बुजुर्गों व देवताओं के प्रति श्रद्धा व भक्ति, आध्यात्मिक उन्नति, स्वप्न, उच्च शिक्षा, पत्नी का छोटा भाई, भाई की पत्नी, तीर्थयात्रा, दर्शन, आत्माओं से संपर्क। दशम भाव : कर्म, नौकरी, व्यवसाय, पद, ख्‍याति, व्यवसाय, कीर्ति, शक्ति, अधिकार, नेतृत्व, सत्ता, सम्मान, सफलता, रूतबा, घुटने, चरित्र, कर्म, उद्देश्य, पिता, मालिक, नियोजक, अधि...

Indian Vedic Astrology (Mathematical Results) Part - 47 Ashtottari Dasha Sadhana, auspicious results according to Bhava, special in Ashtottari Dasha experiment

  Thoughts from the twelve houses of the horoscope (remaining in the previous article) Seventh house: Marriage, Spouse, His Personality, Relationship with Spouse, Business Partner, Desires, Work Power, Partnership, Direct Enemy, Compensation, Travel, Law, Danger to Life, Influence and Reputation in Foreign Countries, Relationship with Public, Venereal Disease, Urinary diseases, antidote. Eighth house: Age, type of death i.e. how to die, genital, obstacles, accident, free property, inheritance, inheritance, ancestral property, will, pension, apparel, theft, robbery, worry, obstruction, war, enemy, inherited wealth, Mental pain, in-laws, life outside marriage. Ninth Bhav: Luck, Father, Guru, Religion, Good fortune, Character, Grandparents, Long journeys, Grandson, Devotion and devotion to elders and deities, Spiritual growth, Dreams, Higher education, Younger brother of wife, Wife of brother, Pilgrimage, Darshan Contact with spirits. Tenth Bhav: job, job, occupation, position, fame, ...

Indian Vedic Astrology (Mathematics - Results) Part - 46, Brief Introduction to Astrology, Ashtottari Dasha, Thoughts from the Twelve Houses of the Horoscope:

 Brief introduction of astrology: Lord Shiva is the inventor, creator and pioneer of astrology. First of all Shiva gave the knowledge of astrology to Nandi, Nandi told it to mother Jagdamba, then to the seven sages and going ahead, Trikal seers discovered the secrets of this knowledge. According to astrology, there have been 18 Maharishi promoters or founders of astrology. According to Kashyap, their names are Surya, Pitamah, Vyasa, Vashishtha, Atri, Parashara, Kashyapa, Narada, Garga, Marichi, Manu, Angira, Lomesh, Paulish, Chyavan, Yavana, Bhrigu and Shaunak respectively. Jyotishaan Suryadhigrahanam Bodhakam Shastram In other words : The scripture that gives understanding of sun, planet and time is called astrology. In this, mainly the nature of planets, constellations etc., description of events related to communication, travel time, eclipse and position and auspicious results are described. The calculation and representation of planetary constellations located in the constellat...

भारतीय वैदिक ज्योतिषशास्त्र ( गणित - फलित ) भाग - ४६ , ज्योतिषशास्त्र का संक्षिप्त परिचय, अष्टोत्तरी दशा, कुंडली के बारहों भाव से विचार :

  ज्योतिषशास्त्र का संक्षिप्त परिचय : ज्योतिष शास्त्र के अविष्कारक, रचयिता, प्रणेता भगवान शिव हैं। ज्योतिष ज्ञान को सबसे पहले शिव ने नंदी को दिया नंदी ने मां जगदंबा को बताया फिर सप्त ऋषियों को और आगे जाकर त्रिकाल दर्शियों ने इस विद्या के रहस्य खोजे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ज्योतिष के 18 महर्षि प्रवर्तक या संस्थापक हुए हैं। कश्यप के मतानुसार इनके नाम क्रमश: सूर्य, पितामह, व्यास, वशिष्ट, अत्रि, पाराशर, कश्यप, नारद, गर्ग, मरीचि, मनु, अंगिरा, लोमेश, पौलिश, च्यवन, यवन, भृगु एवं शौनक हैं। ज्योतिषां सूर्यादिग्रहाणां बोधकं शास्त्रम्  अर्थात : सूर्यादि ग्रह और काल का बोध कराने वाले शास्त्र को ज्योतिष शास्त्र कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से ग्रह, नक्षत्र आदि के स्वरूप, संचार, परिभ्रमण काल, ग्रहण और स्थिति संबधित घटनाओं का निरूपण एवं शुभाशुभ फलों का कथन किया जाता है। नभमंडल में स्थित ग्रह नक्षत्रों की गणना एवं निरूपण मनुष्य जीवन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं और यह व्यक्तित्व की परीक्षा की भी एक कारगर तकनीक है और इसके द्वारा किसी व्यक्ति के भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पता किया जा सकता ह...

Jwaladevi temple out of 51 Shaktipeeths, strange but true, no one could understand the secret of flame of miraculous Jwala Devi

  Bizarre but true: No one could understand the secret of the flame of the miraculous Jwala Devi: On the auspicious occasion of Navratri, visit Maa Jwala Devi on the first day and in this series of strange but true facts, know the secret of the divine light of the Goddess, which no one could know till date. Jwala Devi is one of the Shaktipeeths of Maa Bhagwati. Located in Himachal Pradesh. The temple of Maa Jota Wali is also known as Nagarkot. The biggest miracle of this temple is that it is not an idol but nine flames emanating from the womb of the earth are worshipped. Natural flames have been burning in the Jwala Devi temple for centuries. A total of 9 flames in number, symbolize the 9 forms of Maa Durga. Geologists have been working for the last several years to know their secret, but even after digging 9 km, till date they have not found the place from where natural gas comes out. First of all this temple was built by Raja Bhumi Chand. Here the temple has been built on these f...

51 शक्तिपीठों में से ज्वालादेवी मंदिर, विचित्र किंतु सत्य, कोई न समझ पाया चमत्कारी ज्वाला देवी की ज्वाला का रहस्य :

  कोई न समझ पाया चमत्कारी ज्वाला देवी की ज्वाला का रहस्य : नवरात्र के पावन अवसर पर सबसे पहले दिन कीजिए मां ज्वाला देवी के दर्शन और विचित्र किंतु सत्य की इस श्रृंखला में जानिए देवी की दिव्य ज्योति का रहस्य जिसे आज तक कोई नहीं जान सका। मां भगवती के शक्तिपीठों में से एक ज्वाला देवी । हिमाचल प्रदेश में स्थित हैं। मां जोता वाली के मंदिर को नगरकोट भी कहा जाता है। इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि इसमे किसी मूर्ति की नहीं बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही 9 ज्वालाओं की पूजा होती है। ज्वाला देवी मंदिर में सदियों से प्राकृतिक ज्वालाएं जल रही हैं। संख्या में कुल 9 ज्वालाएं, मां दुर्गा के 9 स्वरूपों का प्रतीक हैं। इनका रहस्य जानने के लिए पिछले कई साल से भू-वैज्ञानिक जुटे हुए हैं, लेकिन 9 किमी खुदाई करने के बाद भी उन्हें आज तक वह जगह ही नहीं मिली जहां से प्राकृतिक गैस निकलती हो। सबसे पहले इस मंदिर का निर्माण राजा भूमि चंद ने कराया था। यहां पर पृथ्वी के गर्भ निकलती इन ज्वालाओं पर ही मंदिर बना दिया गया हैं। इन 9 ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासिनी, महालक्ष्मी, सरस्...